ऐ रात धीरे से आ ज़रा


ऐ रात धीरे से आ ज़रा
रौशन हो रहे हैं माज़ी के सितारे
चाँद भी छिड़क रहा है चांदनी सुहानी
दे रहा है सिसकने के दो चार बहाने

*

ऐ रात धीरे से आ ज़रा
ये महफ़िल आज कुछ अजीब सी है
यादें बिन बुलाये बैठी हैं
और शमा भी बुझी बुझी सी है

*

ऐ रात धीरे से आ ज़रा
आज नींद का कुछ पता नहीं
ये ख़याल बहुत सताते हैं
बाकि तुमसे कोई गिला नहीं

*

ऐ रात धीरे से आ ज़रा
ऐ रात धीरे से आ ज़रा ..

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माज़ी- Past

यह कैफियत है कैसी


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अब तो किसी को बताई भी ना जाए
यह कैफियत है कैसी,
यह मुश्किल है कैसी,
कि दर्द में तबस्सुम,
आंसू में ख़ुशी,
मात में भी जीत का जश्न,
मनाता है यह मन..

की उजाले में अँधेरा,
शब में रौशनी,
सुखा कर, फिर आँखों को
रुलाता है यह मन..

यह कैफियत है कैसी,
कि भूले भी नहीं,
वो शाम, वो बातें,
वो चमक, वो मंज़र,
और नए नज़ारों,
नए ठिकानों,
की ओर कदम
बढ़ता है यह मन..

Word meanings: तबस्सुम: smile, कैफियत: condition or state

मन में एक बात है..


मन में एक बात है,
छुपी सी,
डरी सी,
जो मेरी घबराहट में घुल रही है अब,
धीरे धीरे’..

जो लबों तक आती तो है,
पर सन्नाटे से डर कर,
रह जाती है,
वहीँ की वहीँ

जो आँखों से झांकती तो है,
पर नमी से धुलकर,
बह जाती है,
कहीं की कहीं

वो बात अनकही, अनसुनी
कहीं रह न जाये, मन में ही
वो बात,
जो घुल रही है घबराहट में,
कहीं अफ़सोस से रु बरु न हो जाये

कुछ वक़्त और,
कुछ कोशिशें और,
कुछ उम्मीदें और,
रख ली हैं
शायद यह बात,
बिना कहे,
पोहच जाये,
तुम तक ..

कुछ तो सिखा गयी हैं मुझे…


वो  उलझनें .. वो  कश्म्कश ..
वो  अनकही  शिकायतें ..
वो  खामोशियाँ .. वो  सिसकियाँ
वो  अनसुनी  सी  आहटें ..

वो  जिंदगी  से  दूर ..
कहीं  जाने  की  कोशिशें ..
वो  जिंदगी  को  हाथों  में ..
समेटने  की  साज़िशें ..

कुछ  तो  सिखा  गयी  हैं  मुझे ..
वो  अँधेरी  सी  रातें ..
वो  कानों  को  चुब्ती  हुई ..
तीखी  सी  बातें ..

वो  आँसुओं  को  छुपाती ..
बिन  मौसम  बरसातें ..
वो  कडवी  मीठी  सी ..
आती  हुई  यादें ..

कुछ  तो  सिखा  गयी  हैं  मुझे …
कुछ  तो  सिखा  गयी  हैं  मुझे ….

ये ख़याल..


कभी दबे पाँव आते हैं,
कभी शोर मचाते हैं,
कभी नींद से जगाकर,
नए ख्वाब दिखाते हैं..
ये ख़याल..

*

कभी बातें बन जाते हैं,
कभी यूँ ही रह जाते हैं,
कभी कोरे कागज़ पर,
होली खेलना चाहते हैं..
ये ख़याल..

*

कभी आँखों की नमी में,
कभी शब्दों की कमी में,
ग़ुम जाते हैं,
खो जाते हैं..
ये ख़याल..

*

कभी रात के अँधेरे में,
चाँद से बतियाते हैं,
कभी उढ़ते बादलों में,
चेहरे बनाते हैं..
ये ख़याल..

*

कभी खुद में डुबाते हैं,
कभी साँस लेना सिखाते हैं,
कभी बस यूँ ही,
छू कर चले जाते हैं..
ये ख़याल..

पलकों पर रखी बूंद


जबसे  आंसुओं  को शब्दों में तब्दील होते देखा है,

तबसे ग़म का ग़म करना छोड़ दिया हमने..

अब जब भी  अलफ़ाज़ साथ नहीं देते,

हम पलकों पर रखी बूंदों को छलका देते हैं..

कोरे कागज़ पर गिर कर उन्हें मोती बनते देखा है हमने ,

उन्हें सियाही के रंग में रंगते हुए , देखा है हमने..

word meanings: तब्दील-change, अलफ़ाज़-words

ख्वाहिशों की कश्ती


ख्वाहिशों  की  कश्ती  को  पानी  पर  बिठा  कर
हवाओं  के  रुख  से  नाराज़गी  जताते  हो
लहरों  के  इंतज़ार  में  बैठ  कर  इक  किनारे
चाँद  की चांदनी  से  दोस्ती बढ़ाते  हो..

*
बेचैन  होकर, इत्मीनान  खोकर..
हाथों से  ही  लहरें  बनाते  हो  ..
फिर  दूर  जाते  देख  कश्ती  को..
न जाने  क्यों , उसे  वापिस बुलाते  हो..

*
पानी  में  छलांग  लगाकर ..
भीगी  हुई  कश्ती  को फिर  से सुखाते  हो..
तबदीली  से रूबरू  होकर..
लौट  जाने को कदम बढाते हो..

Word meanings: इत्मीनान- Patience; तबदीली-Change; रुख – Direction